सोमवार, ४ मे, २०२६

वृत्त बध्द शार्दुलविक्रीडित

फक्त वृत्त बध्द कविता उपक्रम 
29/4/26
वृत्त शादृलविक्रीडित
लगावली
गागागा ललगा लगाल ललगा  गागाल  गागाल गा!

बोह-या वरती  नटून बसली !  वरमाळ शोभे करा
लाजूनी हसली अधीर नयनी ! आनंद दाटे  खरा

ऐकूनी   शुभ कामना  वधु हसे !  झालीय हर्षे मनी. 
पाहूनी ्सकळांस ती सविनये !  संतोष पावे क्षणी


संसारी सुख संपदा हर पळा !  लाभो तुला कांंक्षिणी
सोनाली वरते नरेश सखया !  वदती तुला कामिनी 
                                        
 
वैशाली वर्तक 
                                       


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