शुक्रवार, १७ ऑक्टोबर, २०२५

वृत्त आनंद ...प्रेम. आनंद वृत्तात

*प्रेम* रचना

वृत्त आनंद
गागालगा लगागा
   विषय ...पहिले प्रेम 
लगावली   गागालगा लगागा 

गागा लगा लगागा 

आली सहज समोरच 
अवचित नजरच जाता
आशा मनी उगाचच 
भरली मनात आता.


माझे मला कळेना
शोधू कसा बहाणा
पाहू कधी तुला मी
झालो  तुझा दिवाणा.

सांगू तरी पहातो.   
हे भाव अंतरीचे
  वाटे सहज कळावे  
.  बोल तु जला मनाचे.
         
            
वाटे तुला पहावे
 नयनी तुझ्या ठसावे
हे वेड जीव घेणे
केव्हा तरी वदावे

 सांगेन चार गोष्टी 
घेऊन हात हाती
ये ना समोर आता                    
होशील का ग साथी .               

वैशाली       वर्तक 
                                           

रविवार, १२ ऑक्टोबर, २०२५

१५ **पावसाच्या कविता** (१६)षडाक्षरी तृप्त झाली धरा येरे घना येरे घना आज पाऊस थोडा आहे

वृत्त बध्द. आनंद वृत्त पहिले प्रेम

आणि *प्रेम* रचना

वृत्त आनंद
गागालगा लगागा
   विषय ...पहिले प्रेम 
लगावली   गागा लगा लगागा 

गागा लगा लगागा 

आली सहज समोरच 
अवचित नजरच जाता
आशा मनी उगाचच 
भरली मनात आता.


माझे मला कळेना
शोधू कसा बहाणा
पाहू कधी तुला मी
झालो  तुझा दिवाणा.

सांगू तरी पहातो.   
हे भाव अंतरीचे
  वाटे सहज कळावे  
.  बोल तु जला मनाचे.
         
            
वाटे तुला पहावे
 नयनी तुझ्या ठसावे
हे वेड जीव घेणे
केव्हा तरी वदावे

 सांगेन चार गोष्टी 
घेऊन हात हाती
ये ना समोर आता                    
होशील का ग साथी .                                                                   correct !!

वही.

मोहरली लेखणी साहित्य समूह  उपक्रम 1391 दि 3/2/26 विषय. वही आनंदिले मनोमनी वही पाहून  सुंदर  गुज मनीचे सांगण्या  मन धावे क्षणभर  किती सुबक बा...