मंगळवार, १० जून, २०२५

ओळ काव्य मन मोहना तुझी बासरी

विश्व लेखकांचे 
उपक्रम ओळ काव्यलेखन 
ओळ.    *मन मोहना तुझी बासरी*
पहा कडव्यात पहिली दुस-या  2रीतसेत 3... 3 चौथ्या त चौथी


*मन मोहना तुझी बासरी*
वेड लावी गोकुळाला
 चारा खाणे विसरती गायी (पाडसे)
  भूल पडे जन  मनाला

होता कृष्ण मय राधा
*मन मोहना तुझी बासरी*
गोकुळवासी  येती ऐकण्या
 कृष्ण नाम असे अधरी

गवळण राधा करिते
अविरत हरिचे चिंतन
*मन मोहना तुझी बासरी*   
 ऐकून कृष्ण बोलती कंकण 

कशी आवरु मनाला
मन गुंतते तुझ्याच अंतरी
भुल  पाडे या राधेला
*मनमोहना तुझी बासरी*
              
 वैशाली वर्तक 
अहमदाबाद 
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रविवार, ८ जून, २०२५

अभंग..... माझी कविता महास्पर्धा

माझी कविता 

माझी प्रिय सखी |
आहेची  कविता ||
विचार सरिता    |
 वाहे सदा        ||  १

गुज मनातील    |
भावना अव्यक्त ||
करितसे व्यक्त   |
सदा साठी      ||     २

नकळत ओळी |
स्फुरती मनात ||
झरती क्षणात  |
काव्यरुपी      ||       ३

नेटक्या शब्दांची |
सुरेख बांधणी ||
ओळींची मांडणी |               
 कवितेची   ||           ४

चाले शब्द खेळ |
शब्दांना आकार ||
कविता साकार. |
होत असे.        ||       ५   

भाव भावनांचे |
जीवनी ओधळ ||
शब्दांनी ओंजळ |
भरितसे ||.                 ६

मधाळ शब्दात |
कधी प्रबोधन ||
संस्कार जतन |
तीच  करी.    ||.          ७

नित्याचे जाहले |
स्फुरते सहज || 
विषय गरज |
तिज नसे ||.               ८

कविता रचिता |
मिळे सुख भारी ||
मनास उभारी |
मिळतसे ||.               ९

कविता देतसे |
आत्म समाधान ||
शारदेचे दान |
मजलागी.  ||.           १०   







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वही.

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