गुरुवार, ३ एप्रिल, २०२५

अभंग..जीवन प्रवास. जीवन


सिध्द साहित्यिक समूह 
आयोजित उपक्रम 
अभंग लेखन 

विषय. ...जीवन

                                                  वर्ल्ड व्हिजन टाईम्स मध्ये 9/2/26

जन्म अन् मृत्यू.  | यातील काळास|
जीवन प्रवास      | वदताती ||

रम्यची तो काळ |. बालपणी असे. |
चिंता कधी नसे. | बालपणी. ||

पुढचा तो काळ |  येतो प्रौढत्वाचा |. 
दावी कर्तृत्वाचा | याच काळी.  ||

संस्कार मिळाले | कर्म हाची देव |
तीच मोठी ठेव. |. जीवनाची ||


जोडीदार सह | आनंदी जीवन |
लाभे मनोमन | जीवनाते ||

वृत्ती समाधानी. | हवी तडजोड. |
संसार तो  गोड | होत असे.  ||

संसारिक सुख |. लाभे प्रपंचाला |. 
आनंद मनाला.|मिळतसे. ||

जीवन जगणे | असे कला छान |
जीवनाची शान | वाढवावी ||

वैशाली वर्तक 
अहमदाबाद


अक्षरछंद उपक्रम २
मोठा अभंग 
विषय. संसार 
दि १६\८\२५


फुलावे संसारी   |सुखाचे चांदणे  |
देवाशी मागणे   |सर्वांसाठी.       || १

संसार  म्हणजे  | सुख दुःख खेळ |
 जमवावा मेळ | आनंदाने        ||    २

मातेचे संस्कार   | रहा समाधानी |
 नको अभिमानी |  संसारात.      ||  ३

करण्या  सुखाचा | प्रेमाचा संसार |
ऐका गीता सार    | नित्य नेमे.    || ४

संसाराची चिंता    |असता नवीन |
संसार कठीण.     |  वाटतसे     ||  ५

विण ती प्रेमाची   | जरी दोन  मने |
 भासते न उणे.     |एकमेका.     ||६

सदा ठेवा ध्यानी   | नको कुरघोडी  |.
टिकवण्या गोडी    |संसारात         ||७

मिळे सुख सदा     | हवी वाणी गोड |
करा तडजोड.       | संध्याकाळ      ||   ८

माझिया संसारी   |सुखाचे चांदण  | 
वंदिते चरण         | ईश्वराचे         || ९

वैशाली वर्तक,
 अहमदाबाद

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