मंगळवार, १० नोव्हेंबर, २०२०

भावगीत ...... भेट आपुली स्मरते

भेट आठव अपुली, चंद्र  साक्षीत घडलेली   16
  हाती घेवूनीया हात वचने ती  दिधलेली   16


    गंध  येई सुमनांचा थंड हवेचा  गारवा       16      
धुंद रात्री मिळुनिया, गोड गायिला मारवा      16
किती  मधुर सुरात चांदरात  रंगलेली   16
          भेट स्मरे अपुली, चंद्र  साक्षीत घडलेली   16

  फुले  हसली गंधित पाहूनी अबोल प्रीत   16  
  वदली  ती हळुवार  ,  हीच असे प्रेम रीत   16   (  हीच का प्रेमाची रीत)
  ऐकून शब्द कानी,   अलवार  उमलली   16
    भेट स्मरे अपुली, चंद्र  साक्षीत घडलेली   16

 अवचित आलो  आज   चंद्र  पहा तो  हसला    16
आठवून ती रात्र, वृक्ष  फुलांनी बहरला   16         
तया आपुली प्रीती ही , मनातून  स्मरलेली  16
भेट स्मरे अपुली, चंद्र  साक्षीत घडलेली   16

  .....वैशाली वर्तक10/11/20





 
 चित्र   काव्य
 
आठव ती भेट आपुली
चंद्राच्या साक्षीत घडलेली
 घेऊनिया हात हाती
 वचने ती  दिधलेली

स्मरतो तो गंध सुमनांचा
मंद हवेतला गारवा
धुंद रात्री  दोन जीवांनी
गोड गायला मारवा



 उमलेली गंधीत फूले ती
हसली पाहूनी अबोल प्रीत
कुजबुजली एकमेकात
 अशी असते प्रेमाची रीत

आज आलो पुन्हा  तेथेच
तोच चंद्र  पहा  हसला
आठवता  ती मुग्ध रात्र
वृक्ष फुले उधळीत बहरला

  .....वैशाली वर्तक








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